ज्योतिष में गृह योग
ज्योतिष से हम जहाँ हर विषय को जन सकते हैं वहीँ हम अपना घर कैसा होगा ? कब होगा? हम उसमे सुखी रहेंगे या नहीं
इन सभी विषयों का विचार भी हम ज्योतिष से कर सकते हैं
कुंडली में घर का योग देखने के लिए चतुर्थ भाव का प्रयोग किया जाता है साथ ही मंगल का भी विचार आवश्यक होगा
कई बार ऐसे भी अनुभव सामने आये हैं जहाँ व्यक्ति के पास घर तो है पर वह वहां रह नहीं सकता
उसने कई जगह भूमि या घर खरीदें है पर उपयोग कोई और कर रहा होता है या उसमे विवाद चल रहा होता है आदि........
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गुरुवार, अगस्त 19, 2010
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जय भगवति देवि नमो वरदे,जय पाप विनाशिनी बहु फल दे | जय शुम्भ-निशुम्भ कपालधरे,प्रणमामि तु देवि नमो वरदे| जय चन्द्र-दिवाकर नेत्रधरे,जय पाव...

4 टिप्पणियां:
आचार्य जी प्रणाम
आपने जैसा बताया था वैसा मैंने उपाय कर लिया है अभी पूरा आराम तो नहीं हुआ पर पहले से बहुत अच्छा है | आपने मुझे २८ दिन के अन्दर लाभ मिलना आरम्भ हो जायेगा ऐसा कहा था अभी १५ दिनों में ही आराम हों अचलु हो गया है |आपके द्वारा दिए गए मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद्
सुशीला
भूपेंद्र जी नमो नमः
आपने गृह प्राप्ति के योग के बारे में लिखना चालू कर दिया है मई इंतजार कर रहा हूँ |
आपने एक बात कही की यदि मंगल अच्छा न हो तो परेशानी आती है कृपया इस विषय को स्पष्ट करें
भवान गृह विषये शीघ्रम लिखतु अहम् प्रतीक्षाम करोमि
पंडित जी जय श्री राम
आप बहुत अच्छा लिखते रहते हैं | आप मेरे बारे में भी कुछ बताएं
anshika
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