गुरुवार, अगस्त 19, 2010

ज्योतिष में गृह योग


ज्योतिष से हम जहाँ हर विषय को जन सकते हैं वहीँ हम अपना घर कैसा होगा ? कब होगा? हम उसमे सुखी रहेंगे या नहीं
इन सभी विषयों का विचार भी हम ज्योतिष से कर सकते हैं
कुंडली में घर का योग देखने के लिए चतुर्थ भाव का प्रयोग किया जाता है साथ ही मंगल का भी विचार आवश्यक होगा
कई बार ऐसे भी अनुभव सामने आये हैं जहाँ व्यक्ति के पास घर तो है पर वह वहां रह नहीं सकता
उसने कई जगह भूमि या घर खरीदें है पर उपयोग कोई और कर रहा होता है या उसमे विवाद चल रहा होता है आदि........

4 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

आचार्य जी प्रणाम
आपने जैसा बताया था वैसा मैंने उपाय कर लिया है अभी पूरा आराम तो नहीं हुआ पर पहले से बहुत अच्छा है | आपने मुझे २८ दिन के अन्दर लाभ मिलना आरम्भ हो जायेगा ऐसा कहा था अभी १५ दिनों में ही आराम हों अचलु हो गया है |आपके द्वारा दिए गए मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद्
सुशीला

बेनामी ने कहा…

भूपेंद्र जी नमो नमः
आपने गृह प्राप्ति के योग के बारे में लिखना चालू कर दिया है मई इंतजार कर रहा हूँ |
आपने एक बात कही की यदि मंगल अच्छा न हो तो परेशानी आती है कृपया इस विषय को स्पष्ट करें

बेनामी ने कहा…

भवान गृह विषये शीघ्रम लिखतु अहम् प्रतीक्षाम करोमि

बेनामी ने कहा…

पंडित जी जय श्री राम
आप बहुत अच्छा लिखते रहते हैं | आप मेरे बारे में भी कुछ बताएं
anshika

Featured Post

पाराशर के अनुसार ग्रह दृष्टि

पश्यन्ति सप्तमं सर्वे शनि जीव कुजः पुनः ।  विशेषतश्च त्रिदशत्रिकोणचतुरष्टमान् || भावः - यहाँ पर ग्रहों की दृष्टि के बारे में बतलाते हु...