भारतीय ज्योतिष शास्त्र अपने आप में ही विशाल और समुद्र के सामान है जो मानव जीवन के लिए हर विधि से उपयोगी और परोपकारी है | ज्योतिष शास्त्र एक दर्पण के समान है जो चहरे को देखते ही वह चहरे को स्पष्ट कर देता है|
अतः यदि हम एक विषय को लेकर भी चर्चा करें तो उसके लिए भी अधिक समय अपेक्षित होगा| इसीलिए हम क्रमशः कुंडली विचार का अध्ययन करेंगे| मेरा अनुभव है सभी भविष्य साधक विधियाँ आपस में एक जैसी ही हैं| ज्योतिष शास्त्र मूलतः संस्कृत में विद्यमान है| यद्यपि आज अनुवाद प्रणाली ने सभी पुस्तकों को अनुवाद द्वारा उपयोगी बनाया जा रहा है| ज्योतिष शास्त्र में यह ग्रन्थ उपयोगी और परोपकारी हैं जैसे -
१ बृहद पराशर होरा शास्त्र
२- बृहद जातक
३ सारावली
४-लघु पाराशरी
५- बृहद संहिता
६- फल दीपिका
७- भृगु संहिता
एसे ही अनेको ग्रन्थ संस्कृत में भारतीय मनीषियों के द्वारा गहन अध्ययन और तप साधना से लिखे गए| यद्यपि सभी शास्त्रों को और शोधों को समय के अनुसार नए विचारों की आवश्यकता होती है| यह विचार किसी भी भाषा में भले हों परन्तु संस्कृत के बिना अधूरे ही रहेंगे| अतः मेरा अनुरोध है क़ि सब कुछ जानने के साथ ही संस्कृत अवश्य जाने संस्कृत अवश्य बोलें|
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मंगलवार, अप्रैल 13, 2010
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