भारतीय ज्योतिष में बाल-अरिष्ट के लिए प्रमुख तीन कारणों को स्पष्ट किया गया है |
१ गंड-अरिष्ट
२-ग्रह-अरिष्ट
३- पताकी-अरिष्ट
जिन अरिष्टों में हम ग्रह-अरिष्ट का प्रथम विचार करते हैं -
१-यदि चारोँ केन्द्रों में क्रमशः चन्द्र,मंगल,शनि,और सूर्य बैठा हो तो बालक के लिए अरिष्ट होता है |
२-यदि लग्न में चन्द्र बारहवें स्थान में शनि,नवम में सूर्य और अष्टम में मंगल हो तो ऐसे जातक को अरिष्ट होता है|
३-चंद्रमा किसी भाव में भी किसी पापग्रह के साथ बैठा हो तो और उस पर किसी शुभ ग्रह क़ि उस पर दृष्टि न हो तो बालक के लिए बहुत ही शीघ्र अरिष्ट होता है |
४-क्षीण चन्द्र यदि लग्न में बैठा हो तो और अष्टम तथा केंद्र में कोई शुभ ग्रह न हो तो एक मास के अन्दर जातक के लिए अरिष्ट होता है |
क्रमशः --
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गुरुवार, सितंबर 09, 2010
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