यह योग मंगल के द्वारा बनता है -
यदि मंगल के मेष,वृश्चिक , मकर में (उच्च अंशों में ) हो तो यह योग होता है | यह योग और भी प्रभावी होता है जब यह केंद्र में बनता है | मेरे अनुभव में यदि यह योग दशम में हो और अधिक प्रभावी होता है |
मंगल के द्वारा बनने वाला यह योग मंगल के प्रभाव को बढाता है | यदि यह योग मेष-कर्क-सिंह-मकर-और मीन राशियों में सबसे उत्तम फल देता है और धनु-वृश्चिक लग्नों में इसका मध्यम फल होता है | शेष अन्य लग्नों में
इसका फल बहुत अच्छा नहीं होता है |
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