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शुक्रवार, अक्टूबर 01, 2010

आज का मुहूर्त 02-10-2010

आज का मुहूर्त 
आज का सुविचार - न जातु कामः कामानां उपभोगेन शाम्यति 

''कामनाओं की शांति कामना को पूरा करने से नहीं होती ,क्या कभी आग में घी डालने से आग शांत होती है '' 
संवत - 2067
माह - आश्विन कृष्ण पक्ष 
तिथि-नवमी  14.24  तक शनिवार
नक्षत्र  - पुनर्वसु  15.48   तक 
योग- परिघ 08.34  तक 
विशेष - नवमी श्राद्ध  माता -नवमी ( सौभाग्य-वती स्त्रियों का श्राद्ध)
जीवत्पुत्रिका व्रत  का पारण 
महात्मा गाँधी जयन्ती Gandhi An Autobiography: The Story of My Experiments With Truth
चन्द्र राशि - प्रातः मिथुन में , १०-०३ से कर्क राशि में 
सूर्य राशि- कन्या 
मुहूर्त- आज नक्षत्र का राहु से वेध होने के कारण मुहूर्त का अभाव 

गुरुवार, सितंबर 30, 2010

01-10-2010 ka muhurt

आज का सुविचार -
"परिश्रम करने वाले के पास अभाव नहीं रहता है"
उद्योगे नास्ति दरिद्रता         ( चाणक्य नीति ) 
 आज का मुहूर्त - 01-10-2010
संवत -2067
माह - आश्विन कृष्ण पक्ष
तिथि-अष्टमी  दिन -16.00  तक
वार- शुक्रवार 
नक्षत्र - आर्द्रा दिन 16.47   तक
योग-वरीयान 10.58 तक 
चन्द्र राशि- मिथुन 
सूर्य राशि - कन्या 
विशेष योग- सर्वार्थ सिद्धि योग समय   16.47  से     
व्रत - जीवत्पुत्रिका ( जिनके पुत्र नहीं जीवित रहते ऐसे लोगों के लिए यह व्रत बहुत ही लाभ कारी रहता है और जिनके दीर्घायु की कामना हो उनके लिए भी यह व्रत बहुत अच्छा है )
श्राद्ध- अष्टमी ( गया- अष्टमी )

गुरुवार, अप्रैल 15, 2010

मंगलवार, अप्रैल 13, 2010

raj yog,naulkari

कुंडली में राजयोग का नाम बहुत ही विख्यात है| वस्तुतः यह राज योग शब्द आज भ्रामक बन गया है| राज योग से हमने केवल राजा बनना ही अर्थ लगाया है |
राज योग का अर्थ यदि हम संस्कृत क़ि दृष्टि से देखे तो-
राज्ञः योगः इति अर्थात षष्ठी तत्पुरुष समास में यह शब्द बनता है जिसका शब्दार्थ होती है राजा का योग| 
अब यदि हम इसका भावार्थ देखे तो व्यापक रूप में यह समझ में आता है क़ि पहले समय में राज तंत्र क़ि व्यवस्था थी परन्तु आज प्रजा तंत्र होने के कारण यह शब्द आज परिभाषित नहीं  होगा | तो यह शब्द आज विशेष धन प्राप्ति ,विशेष शासन,विशेष पद की प्राप्ति के लिए प्रयोग किया जाता है|
अतः  विशेष पद आई.एस .ऑफिसर्स .मंत्री , जैसे पद आते हैं| अब 
इन पदों के लिए ग्रहों का बल के अनुसार निर्णय करना होता है|
कुंडली में ग्रहों का बलाबल के अनुसार राजयोग का प्रभाव और राजयोग का लाभ प्राप्त किया जाता है|

mera vichar

भारतीय ज्योतिष शास्त्र अपने आप में ही विशाल और समुद्र के सामान है जो मानव जीवन के लिए हर विधि से उपयोगी और परोपकारी है | ज्योतिष शास्त्र एक दर्पण के समान है जो चहरे को देखते ही वह चहरे को स्पष्ट कर देता है|
     अतः यदि हम एक विषय को लेकर भी चर्चा करें तो उसके लिए भी अधिक समय अपेक्षित होगा| इसीलिए हम क्रमशः कुंडली विचार का अध्ययन करेंगे| मेरा अनुभव है सभी भविष्य साधक विधियाँ आपस में एक जैसी ही हैं| ज्योतिष शास्त्र मूलतः संस्कृत में विद्यमान है| यद्यपि आज अनुवाद प्रणाली ने सभी पुस्तकों को अनुवाद द्वारा उपयोगी बनाया जा रहा है| ज्योतिष शास्त्र में यह ग्रन्थ उपयोगी और परोपकारी हैं जैसे -
१ बृहद पराशर होरा शास्त्र
२- बृहद जातक
३ सारावली
४-लघु  पाराशरी
५- बृहद संहिता
६- फल दीपिका
७- भृगु संहिता
एसे ही अनेको ग्रन्थ संस्कृत में भारतीय मनीषियों के द्वारा गहन अध्ययन और तप साधना से लिखे गए| यद्यपि सभी शास्त्रों को और शोधों को समय के अनुसार नए विचारों की आवश्यकता होती है| यह विचार किसी भी भाषा में भले हों परन्तु संस्कृत के बिना अधूरे ही रहेंगे| अतः मेरा अनुरोध है क़ि सब कुछ जानने के साथ ही संस्कृत अवश्य जाने संस्कृत अवश्य बोलें|

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