प्रायशः मिट्टी की मूर्ती बनाकर पूजा करने का नियम है | इस व्रत में माता को शृंगार सामग्री अर्पण की जाती
हैं | इस व्रत में रात्रि को सोना वर्जित है | रात्रि में जागरण करना और प्रातः देव विसर्जन के बाद पारण करने का नियम है |
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पश्यन्ति सप्तमं सर्वे शनि जीव कुजः पुनः । विशेषतश्च त्रिदशत्रिकोणचतुरष्टमान् || भावः - यहाँ पर ग्रहों की दृष्टि के बारे में बतलाते हु...
2 टिप्पणियां:
jankari ke liye dhanyavaad.
jay ganesh pandit ji
aapne vrat par bahut thik likha hai meri mammi bahut khush huii maine unko sunaya tha
dhnaywad
anshika
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