गुरु विचार
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरु: देवो महेश्वरः |
गुरु:साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ||
अर्थात गुरु ही ब्रह्म है,गुरु है विष्णु है, गुरु ही शिव है और गुरु ही साक्षात् परं ब्रह्म है | अतः उस परं पद श्रेष्ठ गुरु को नमस्कार है|
"देव मंत्री गुरु: गेयः"
गुरु को ज्योतिष शास्त्र में देवताओं का मंत्री माना गया है| गुरु धनु और मीन राशि का स्वामी है| गुरु कर्क राशि में उच्च और मकर राशि में नीच का प्रभाव देता है|
शरीर में गुरु का स्थान व प्रभाव
रक्त प्रवाह , पैर के उपरी हिस्से,पैर का तलवा,टयूमर,लीवर,
गुरु का स्वभाव
यह शांत,तपस्वी,धर्मिक गुणों से युक्त,साधक,अच्छे सलाहकार और न्याय प्रिय होते हैं|
कार्य क्षेत्र
शिक्षा,जेल,नेवी,अदालत से जुड़े कार्य,अस्पताल ,देवपूजन,विदेशी संस्थाएं,ट्रस्ट,डेवलप मेंट,से जुड़े कार्य,
रोग
पीलिया,लीवर के रोग,सूजन,चर्बी का बढना,कैंसर आदि
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रविवार, जुलाई 11, 2010
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