शनि
आसमान में दिखने वाले सभी ग्रहों से दूर रहने वाला यह ग्रह
कर्म का कारक है | आज समाज में कई प्रकार की भ्रांतियां हैं कि यह ग्रह दुःख दायक है यदि शास्त्र के अनुसार देखें तो यह मालूम चलेगा कि यह ग्रह बिना परिश्रम के कुछ भी नहीं देने वाला | शनि मेहनत करने वालों का मित्र है| यह अन्धकार में भी प्रकाश कि इच्छा रखने वाला ग्रह है अर्थात हर स्थिति पर यह कर्म का प्रतीक है| आज कलयुग में सबसे ज्यादा फलीभूत होने वाला ग्रह शनि ही है |
यह ग्रह मकर और कुम्भ राशि स्वामी और तुला में उच्च का होता है | मेष में जाकर यह ग्रह नीच का फल देता है|
शनि के गुण
या ग्रह सभी ग्रहों कि अपेक्षा बहुत ही धीमे चलने वाला ग्रह है | यह ग्रह बहुत ही सोच समझकर कार्य करने वाला स्वभाव देता है | यदि कुंडली में शनि अध्यात्म का कारक बन जाता है तब यह बहुत ही सूक्ष्म वैराग्य देता है|
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बुधवार, जुलाई 14, 2010
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