षष्ठ भाव -
यह भाव बाधा ,परेशानी,रोग,शत्रु,मामा,नौकर,नौकरी,क्रूर कर्म का कारक है
सप्तम भाव-
विवाह,पत्नी,व्यापर,यात्रा,जननांग, पत्नी के द्वारा लाभ ,विवाह की दिशा,विवाह का समय,पत्नी का स्वभाव आदि का विचार किया जाता है
http://www.blogger.com/post-create.g?blogID=5926081360506889665
ज्योतिष विश्वकोश (jyotishvishwakosh) App, Webiste के द्वारा ज्योतिष, वास्तुशास्त्र, अंकज्योतिष, प्रश्नज्योतिष. मुहूर्त, शकुन, स्वप्न, नक्षत्र, समाधान, दैनिक मासिक वार्षिक राशिफल-अंकफल, हनुमान् ज्योतिष, कर्मकाण्ड, पूजा पाठ, यन्त्र, मन्त्र, तन्त्र का प्रामाणिक ज्ञान, ज्योतिष से सम्बन्धित सभी ग्रन्थों का ज्ञान और उनको फ्री में पढना, ज्योतिष के विशेष लेखों को पढना, ज्योतिष को सीखना, संहिता ज्योतिष और सिद्धान्त ज्योतिष को पढना सीखना वीडियो (Youtube) के द्वारा सीखना, android app,Web &youtube
बुधवार, मार्च 31, 2010
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
Featured Post
पाराशर के अनुसार ग्रह दृष्टि
पश्यन्ति सप्तमं सर्वे शनि जीव कुजः पुनः । विशेषतश्च त्रिदशत्रिकोणचतुरष्टमान् || भावः - यहाँ पर ग्रहों की दृष्टि के बारे में बतलाते हु...
-
पश्यन्ति सप्तमं सर्वे शनि जीव कुजः पुनः । विशेषतश्च त्रिदशत्रिकोणचतुरष्टमान् || भावः - यहाँ पर ग्रहों की दृष्टि के बारे में बतलाते हु...
-
अंकों का हमारे जीवन में बहुत बड़ा योगदान है। आज हम कोई वाहन लेने जाते हैं तो सोचते हैं कि यदि गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर अपने अनुकूल मिल जा...
-
jyotish,bhavishya,dainik rashiphal,rashifal,sury,chnadra,mangal,budh,guru,shukr,shani,rahu,ketu,kundali
1 टिप्पणी:
saptam bahv par aapka diya gaya vichar atyant hi rochak hai maine ise aajmaya bhi hai aur yah vishay saty bhi laga hai
Dhanyawad
एक टिप्पणी भेजें