बुधवार, मार्च 31, 2010

भाव फल

षष्ठ भाव -
यह भाव बाधा ,परेशानी,रोग,शत्रु,मामा,नौकर,नौकरी,क्रूर कर्म का कारक है
सप्तम भाव-
विवाह,पत्नी,व्यापर,यात्रा,जननांग, पत्नी के द्वारा लाभ ,विवाह की दिशा,विवाह का समय,पत्नी का स्वभाव आदि का विचार किया जाता है
http://www.blogger.com/post-create.g?blogID=5926081360506889665

शुक्रवार, मार्च 26, 2010

द्वितीय भाव,तृतीय भाव,चतुर्थ भाव ,पंचम भाव,

प्रथम भाव के बाद हम द्वितीय भाव का विचार करते हैं -
द्वितीय भाव को धन भाव भी कहते हैं अतः धन ,कुटुंब,परिवार,संचित धन ,आँख,वाणी ,का विचार किया जाता है
तृतीय भाव -पराक्रम भाई, निकट देश की यात्रा ,कान ,हाँथ,का विचार करते हैं
चतुर्थ भाव - माँ ,स्थिर संपत्ति,जल,भूमि,मकान,उत्तर दिशा ,ह्रदय,वाहन विचार करते हैं
पंचम भाव - पुत्र -पुत्री,मन्त्र, बुद्धि,राज्य कृपा,विद्या,ज्ञान, पेट का विचार किया जाता है

गुरुवार, मार्च 25, 2010

ज्योतिष, भविष्य ,ग्रह विचार, हिन्दू धर्म, फलित विचार ,

हमने अभी तक ग्रहों की राशि उच्च-नीच राशियों का अध्ययन किया अब बारह भावों से क्या क्या विचार किया जाता है इस पर अध्ययन करेंगे
सबसे पहले प्रथम (पहला) भाव -
१ - शरीर ,स्वभाव ,गुण,आकृति,कद,रंग,चिह्न,
२- आयु (शरीर के अनुसार ),स्वास्थ्य,
३ विवेक ,बल,
४ सुख,दुःख,तेज,स्थान।
कारक-इस भाव का कारक सूर्य होता है

रविवार, मार्च 21, 2010

Featured Post

पाराशर के अनुसार ग्रह दृष्टि

पश्यन्ति सप्तमं सर्वे शनि जीव कुजः पुनः ।  विशेषतश्च त्रिदशत्रिकोणचतुरष्टमान् || भावः - यहाँ पर ग्रहों की दृष्टि के बारे में बतलाते हु...